८१ म सगर राति दीप जरयमे लोकार्पण

८१ म सगर राति दीप जरयमे एकर लोकार्पण हएत। मण्डन मिश्रक मिथिलाक हेबाक ऐमे कोनो प्रमाण नै अछि। आर्यभट्टक (आदिभट्ट) आ ल़क्ष्मीनाथ गोसांइ, गोनू कुमारिल आदिक चर्च भेटत। संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति (पदावलीक विद्यापतिसँ भिन्न) क चर्च सेहो। सॉफ्ट कॉपी ऐ लिंक पर अछि। https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/
जेना मेघदूतक लेखक कालिदास मिथिलाक नै रहथि कारण मेघ उरिया कऽ सभ ठामगेल मुदा मिथिला नै आएल, तहिना जे उच्चैठमे प्रचलित अछि से कालिदास मिथिलाक किछु यादव कुलमे पूजित आ अमरीताक पुत्र(लोककथामे) रहथि, मुदा से मेघदूतक कालिदाससँ भिन्न। ओना मण्डनक शास्त्रार्थक विवरण आ शंकर दिग्विजय आदिमे मण्डनक पराजय मण्डनक लेखनीमे लक्षित नै होइए (एकर चर्च हमर कथा "शब्दशास्त्रम्" मे भेल अछि), मुदा मण्डनक मिथिलाक हएब नहिये पञ्जीमे नहिये मण्डनक कोनो लेखनी मे नहिये कोनो समकालीन बा परवर्ती लेखकक लेखनमे भेल अछि। नैय्यायिक गंगेशक विवरण पञ्जीमे भेटत। सम्भव जे मण्डन नामक कोनो दोसर व्यक्ति मिथिलामे भेल होथि, मुदा मीमांसक मण्डनक एतुक्का हेबाक प्रमाण नै अछि।
दूषण पञ्जीक आधारपर श्रोत्रिय आ ब्राह्मणक रक्त शुद्धताक सिद्दांत ध्वस्त भ’ जाइत अछि। १००% श्रोत्रिय आ ६०% ब्राह्मण चर्मकारिणी/ देवदासी आदिक रक्त सम्बन्धी सिद्ध होइ छथि।
अतः पञ्जीक आधारपर सिद्ध होइए जे जाति मात्र सोशल-कल्चरल युनिट अछि, रक्त शुद्धताक कोनो प्रमाण उपलब्ध नै अछि।

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