कथा वाचन- लेखन पाठशाला (बाल कथाक विशेष संदर्भमे)

कथा वाचन- लेखन पाठशाला (बाल कथाक विशेष संदर्भमे)

मैथिलीमे कथा वाचन, विशेष क' नेना भुटका लेल बाल कथा वाचनक परम्परा बड्ड पुरान रहल अछि। लोक गाथाक रातिक राति, दिनक दिन प्रदर्शन, बाल सुलभ मोन लेल ओकर छोट वर्जनक गद्य- पद्य मिश्रित एक आ बेशी राति चलैबला दादी- नानीक कथा; दादी- नानी आ बाबा- बाबूक सुनाएल आन लोककथा एकर विभिन्न रूप अछि जे मिथिलाक बालक- बालिकाक मोन मोहने अछि।ऐसँ विपरीत सप्ता डोरासँ ल' ' मधुश्रावणी आ बिहुलाक कथाक जानकारी मात्र बालिके धरि सीमित अछि, एक्के घरमे रहितो किछुए बालक मौगियाहा संज्ञा भेटबाक डरक संग ऐ कथापाठमे सम्मिलित हेबाक साहस करै छथि।
कथाक बीच गीत, कहबी, खेल सेहो होइए। खेल कथाक बालक- बालिका संभ द्वारा वाचन- गायन होइत अछि, आ खेला सेहो चलिते रहैत अछि, कोनो दादी- नानीक प्रवेश नै, कोनो बाबू- बाबा बेदराक खेलमे घुसि नै सकै छथि।
कथापाठक एतेक सुन्दर परम्पराक अछैत मैथिली बालकथा किए असफल भ' गेल, बा अखन धरि असफल अछि। जँ लिली रे केँ छोड़ि दी तँ ई कहैत कनियो संकोच नै जे साहित्य अकादेमी पोषित, से ओ छपाई हुअए बा पुरस्कार, मैथिली बाल कथा साहित्य , बाल साहित्य अछिये नै। आ जँ अहाँमे प्रतिभा नै अछि तँ अनुवाद करू, मुदा प्रायोजित अनुवादक स्तर एहन जे बच्चाक बापक दिन नै छिऐ जे एक्को पैराग्राफ़ पढ़ि लिअए, तते ने मुँह कोचिआबए पड़ै छै।
साहित्य अकादेमीसँ २४ भाषासँ संकलित बाल कथा निकालल गेल। मैथिलीयोक कोटा छै आ रामदेव झा दुनू बापुतक बालकथा कोना नै रहत, नाटक संग्रह एतै तँ फट नाटक तैयार, तही तर्जपर। लिली रे क कथा मुदा सुन्नर अछि। मैथिलीक ऐसँ बदनामी होइ छै, दुनियाँ बुझैए जेमैथिलीक कथाकार बाल कथाक माने बुझबे नै करै छथि।
८२ म सगर राति बालकथा केन्द्रित रहत। ओइ संदर्भमे बाल कथा वाचन- लेखन पाठशालाक आरम्भ कएल जा रहल अछि।
विदेह शिशु उत्सवमे जगदानन्द झा 'मनु'क चोनहा आएल छलन्हि। बाल मनोविज्ञानपर आधारित ई उपन्यास बाल कथा लिखनहारक लेल पाठ्यक्रमक समान अछि, केना कथा आगाँ बढ़ाओल जाए, आ समाप्त कएल जाए, कथा वस्तुक नवीनता एकरा विशिष्ट बनबैए। विदेह शिशु उत्सव ऐ लिंकपर उपलब्ध अछि:-
https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/
से बालकथाक लेखन एना हुअए जे ओ पढ़ै आ सुनै, दुनूमे नीक लागए। ई क्लोजेट नाटक सन हेबाक चाही, जे मंचन लेल नै, असगरे पढ़बाले बा किछु गोटे संग ज़ोर- जोरसँ सुनबा- सुनेबा लेल लिखल जाइए।
सरल विचार, सरल शब्दावली आ सरल भाषा श्रेष्ठ बाल कथा लेखनक चाभी अछि।
जेना ऋगवेदक जल प्रलय, मनु आ महामत्स्यक कथा, सरस्वती नदी, अरायुक्त रथक विवरण, ई सभ आरम्भिक बाल कथाक आकृति देखबैत अछि तहिना अवेस्ताक गिलगमेशक कंथा सेहो। ऋगवेदोसँ पहिने गाथा, नाराशंसी आदिक मौखिक साहित्य छल आ ओइ लेल ऋगवेदमे गाथापति, गाथिन आदिक प्रयोग अछि।
"पंचतंत्र" आ ओकर किछु कथाक पुनर्लेखन "हितोपदेश" सँ बहुत पहिने जातक कथा बाल कथा कहलक आ सेहो चिड़ै चुनमुनीक संग मालजाल आ जानवरक माध्यमसँ, ओना जातककउद्देश्य बौद्ध धर्मक प्रचार सेहो रहै। अही तरहेँ पंचतंत्र बाल कथा कहैत कहैत स्त्री-शूद्रक प्रति पूर्वाग्रह कथामे पैसेलक, आ तेँ ओकर पुनर्लेखनक आवश्यकता अनुभूत भेल। ऋगवेदक आख्यान संवादकेँ जन्म दै छल, जे पौराणिक कथा ख़त्म क' देलक आ तेँ ओइ पौराणिक कथा सभक पुनर्लेखन अखुनका हिसाबे हेबाक चाही।
आधुनिक बाल कथा केहुन हुअए?
ओइमे आधुनिक विज्ञान द्वारा पसारल नीक तत्वक संग पर्यावरण चेतना सेहो हेबाक चाही। माने कथा बुद्धिपरक नै व्यवहारपरक हेबाक चाही।

बालकथामे मनोरंजन आ ज्ञानक समावेश लेल विज्ञान, समाज विज्ञान परक कथा लिखबाक आवश्यकता अछि। बच्चा अपन धरोहरिकेँ बुझए, तेँ लोक कथा, परीकथा, जादू कथा कहल जा सकैए मुदा ई अंधविश्वास नै बढ़बए तइ तरहेँ ओकर लेखन पुनर्लेखन हेबाक चाही।

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